Menu

केंद्र के बारे में

मध्‍य भारत जलविज्ञान क्षेत्रीय केन्‍द्र, (म.भा.ज.क्षे.के.) भोपाल प्रारम्‍भ में दक्षिणी गंगा मैदान क्षेत्रीय केन्‍द्र के नाम से जाना जाता था। जिसकी स्‍थापना 1 दिसंबर 1995 सागर (म.प्र.) में हुई थी।  गंगा की सहायक नदियों के वैज्ञानिक अध्‍ययन के सभी पहलुओं पर विचार करने, समन्‍वय को बढ़ावा देना इस क्षेत्रीय केन्‍द्र का प्रमुख उद्देश्‍य था। क्षेत्रीय केन्‍द्र (म.भा.ज.क्षे.के.) वर्ष 2012 में भोपाल में स्‍थानांतरित हो गया और वर्तमान में वाल्‍मी परिसर भोपाल (म.प्र.) में स्थित है। मध्‍य भारत जलविज्ञान क्षेत्रीय केन्‍द्र,भोपाल के अधिकार क्षेत्र में मध्‍य प्रदेश, उत्‍तर प्रदेश का दक्षिणी भाग, दक्षिण-पूर्व राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़ का उत्‍तरी भाग और बिहार का दक्षिणी पश्चिमी हिस्‍सा शामिल है। क्षेत्रीय केंद्र के प्रमुख कार्य सूखा, कृत्रिम पुनर्भरण,जलवायू परिवर्तन, जलाशयों में  अवसादन, सिंचाई क्षेत्र प्रबंधन, आदि सहित जल संसाधनों के स्थायी प्रबंधन के लिए उचित तरीकों और विधियों को विकसित करने के उद्देश्‍य से वैज्ञानिक अनुसंधान करना है। केन्‍द्र ने मध्‍य भारत में नदी नालों में जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान करने की ओर भी ध्‍यान केंद्रित किया है। जलविज्ञान के विभिन्‍न आयामों पर क्षेत्र के जल संसाधन प्रबंधकों से क्षमता संर्वधन एवं जन सामान्‍य में जल के प्रति जागरूकता हेतु कार्यशाला एंव अन्‍य अभियान चलाना शामिल है।

 विजन एवं मिशन

भारत में जल संसाधनों  के सतत विकास और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए प्रभावी वैज्ञानिक समाधानों के माध्यम से जलविज्ञान संबंधी शोध में नेतृत्व प्रदान करना।v मध्य भारत के क्षेत्र में कछारों और सह-कछारों की विभिन्न जलविज्ञान संबंधी समस्याओं में अनुसंधान एवं अध्ययन करना।

  • संबंधित क्षेत्र के राष्‍ट्रीय एवं अंतराष्‍ट्रीय संगठनों के साथ परामर्श एवं समन्‍वय हस्‍तांतरण एवं जरूरत अनुसार अनुसंधान का संचालन करना।