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केंद्र के बारे में

Y. R. Satya Rao

Dr. Y. R. Satya Rao
Scientist-G & Head
National Institute of Hydrology
Deltaic Regional Centre
Siddhartha Nagar, Vakalpudi Road
Kakinada– 533003(Andra Pradesh), India
Ph: 0884-2372254, Fax: 0884-2350054
Email: nihr@ap.nic.in

राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की के डेल्टा क्षेत्रीय केंद्र (DRC) की स्थापना वर्ष 1991 में आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के काकीनाडा में हुई थी। DRC का अधिकार क्षेत्र अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सहित पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्र तक है। यह केंद्र विभिन्न राज्य सरकार, विभागों, प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं, परामर्शी परियोजनाओं और अंतर्राष्ट्रीय वित्त पोषित परियोजनाओं द्वारा संदर्भित अनुसंधान एवं विकास अध्ययन करता है। केंद्र सभी राज्य जल संसाधन विभागों की विभिन्न समीक्षा बैठकों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है और आंध्र विश्वविद्यालय, विशाखापत्तनम, जेएनटीयू काकीनाडा, आईआईटी, एनआईटी, कृषि विश्वविद्यालय आदि जैसे शैक्षणिक संस्थानों के साथ विचार विमर्श कर रहा है; इसके अलावा, यह आम वैज्ञानिक चुनौतियों पर वीआईटी वेल्लोर, एनजीआरआई, एनआरएससी के साथ सहयोग कर रहा है। इसके अलावा, केंद्र जल विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। क्षेत्र की समस्याओं के विश्लेषण के लिए केंद्र जल गुणवत्ता प्रयोगशाला, जलमौसमविज्ञान वेधशाला, जीआईएस और रिमोट सेंसिंग टूल्स और अन्य जलविज्ञानीय सॉफ्टवेयरों से सुसज्जित है। केंद्र में जलविज्ञान के क्षेत्र में अत्यधिक कुशल मानव संसाधन है।

विजन एवं मिशन :

केंद्र का दृग्विषय राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से भारत के पूर्वी तटीय और डेल्टा क्षेत्रों की विशिष्ट जलविज्ञानीय समस्याओं का समाधान करना है। भारत का पूर्वी तट अधिकांश केंद्रीय और प्रायद्वीपीय नदियों गंगा, महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के बंगाल की खाड़ी में बहने से महत्वपूर्ण नदियों के डेल्टा के माध्यम से जल संसाधनों से समृद्ध है। चूंकि यह एक तटीय क्षेत्र है, इसलिए सतही जल समस्याओं के अलावा भूजल गुणवत्ता की समस्याएं तटीय क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण हैं। सरिताओं और नदियों का पश्चजल, मत्स्यपालन प्रथाएं, भूजल की अत्यधिक पंपिंग उथले जलभृतो में लवणीकरण के मुख्य स्रोत हैं। कमजोर जल निकासी, सिंचाई वापसी प्रवाह और उद्योग भी जल संसाधनों की समस्याओं को बढ़ा रहे हैं। तदनुसार, इन समस्याओं से निपटने के लिए कुछ महत्व वाले क्षेत्रों की पहचान की गयी है, उनमें शहरी जल विज्ञान, जलाशयों का अवसादन, वास्तविक समय में बाढ़ का पूर्वानुमान, नदी के प्रवाह पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, अप्रमापी बेसिनो में अचानक बाढ़, भूजल संदूषण के बिंदु और गैर-बिंदु स्रोत, खारे पानी के घुसपैठ का प्रतिरूपण शामिल है। केंद्र जलविज्ञान और जल संसाधन के क्षेत्र में काम करने वाले अधिकारियों के लाभ के लिए उपयोगकर्ता संपर्क कार्यशाला, विचार मंथन सत्र, सेमिनार भी आयोजित करता है। केंद्र जल संसाधन के क्षेत्र में भारत सरकार के कार्यक्रमों को भी लागू कर रहा है।